बिंदु जी को बिना शर्त रिहा कर, तत्काल दोषी पुलिस वालों पर कार्रवाई करने की मांगों के साथ  NAPM ने मुख्यमंत्री को सौंपा ज्ञापन 

(बिहार के मुख्यमंत्री को दी गई ज्ञापन संलग्न है)

26 अक्टूबर:  जन आंदोलनों के राष्ट्रीय समन्वय (NAPM), सारण (छपरा) जिले के परसा प्रखण्ड के सगुनी की आदर्श सरपंच, प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता बिंदु देवी को गिरफ्तार कर, फर्जी मुकदमा दर्ज करते हुए जेल भेजने की घटना की कड़ें शब्दों में निंदा करते हुए उनको तत्काल रिहा करने , दोषी पुलिस पदाधिकारियों पर तत्काल कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है। समन्वय ने इस आशय का ज्ञापन बिहार के मुख्यमंत्री जो भेजा है। हम देश भर के आंदोलनकारी संगठन इस गिरफ़्तारी के खिलाफ संघर्ष कर रहे बिहार के साथियों के साथ एकजुटता व्यक्त करते हैं।

विदित हो कि बिंदु जी को 24 अक्टूबर की देर शाम अंधेरे में परसा थाने की पुलिस अपशब्द बोलते हुए, उनके साथ दुर्व्यहार करते हुए थाने ले गयी। जब वे इस तरह की पुलिसिया कार्रवाई का प्रतिरोध की और उनके पति मणिलाल जी ने पुलिस अधीक्षक समेत सभी वरिष्ठ लोगों को यह सूचना दिए कि एक उत्कृष्ट योगदान देने वाली महिला सरपंच को रात में पुलिस, कानूनों का उल्लंघन करते हुए  थाने ले गयी है यह घटना  गैर कानूनी व महिलाओं के अधिकारों का खुलमखुला  उल्लंघन  है। इसके बाद  पुलिस, मुकदमा दर्ज कर लॉकअप में बन्द कर दिया। 25 अक्टूबर को दोपहर के बाद बिंदु जी को सीजेएम के सामने लाया गया और छपरा केंद्रीय जेल में शाम में भेज दिया गया है।

यह मामले की शुरुआत बिंदु जी के दो पटीदारों (देयाद) के बीच आपसी झगड़ा व मारपीट  से शुरू हुआ।  बिंदु जी मारपीट देख,  बीच – बचाव करते हुए  छुड़ाने लगीं। जिसके बाद दोषी पक्ष को लगा कि यह सही न्याय दिलाने में मदद करेंगी उसी कारण से इनका नाम भी उस मामले में लाने की साजिश शुरू हो गयीं।

इनके अच्छे कार्यो से भयभीत , भ्रष्ट, राजनैतिक विरोधी भी एकजुट होकर इसको फंसाने में लग गए, बिंदु जी को इसका अंदेशा लगा तो इसके बाद तत्काल थाना प्रभारी को सूचना दीं, फिर लिखित आवेदन दीं कि मारपीट में जो पक्ष गलत किया है वही पक्ष झूठा मुकदमें दर्ज कराने में उनका नाम भी लाने की कोशिश कर रहा है। इस मामले को पुलिस आकर स्थानीय सभी लोगों से बात कर पता करते हुए कोई निर्णय लें। इसके बाद शाम में अंधेरा होने पर थाने की पुलिस आयी और मारपीट करने वालों दोनों पक्षों को पकड़ने के बजाय बिना किसी से पूछ ताछ किए पूर्वाग्रह एवम कपट पूर्वक कार्रवाई करते हुए बिंदु जी के साथ गाली गलौज,  दुर्व्यहार करते, बांह मरोड़ कर जीप में बैठा कर थाने ले गयी।

गैरकानूनी तरीके से थाने ले जाने की घटना पर जब वें प्रतिवाद की और पुलिस अधीक्षक सहित वरिष्ठ पदाधिकारियों को सूचित किया गया तो पुलिस अपने को फंसता देख, बाद में इस गैरकानूनी कार्रवाई पर पर्दा डालने के लिए इनका नाम भी एफआईआर में शामिल कर दिया इतना ही नही इस मामले में इनके पति मणिलाल  जी सहित  पूरे परिवार के सभी सदस्यों पर जिसमें अनेक लोग दिल्ली रहते है उनका नाम भी  प्राथमिकी में फर्जी  तरीके से शामिल कर लिया।

बिंदु जी बिहार में सरपंच का दायित्व निभाने वाली पढ़ी-लिखी ऐसी महिला है जिन्होंने प्रति सप्ताह सरपंच की कचहरी जारी रखकर,  उत्कृष्ट कार्य किए, आदर्श ग्राम कचहरी की अवधारणा को धरातल पर  उतारने में पारदर्शिता व जबावदेही तरीके से आदर्श स्थापित किया। वे महिला आंदोलन से लेकर, समाजिक कार्यो में बड़ी भूमिका निभातीं है। जिनके अच्छे कार्यों के लिए पुरस्कार मिलना चाहिए परन्तु दुर्भाग्य है कि उन्हें फर्जी मुकदमें कर पुलिस जेल भेज दी। उनके पति मणिलाल जी भी चर्चित समाजिक कार्यरता व NAPM के वरिष्ठ साथी है अनेक आंदोलनों से जुड़े है वे पटना उच्च न्यायालय के ऐसे अधिवक्ता है जो गरीब गुरुबा के केस बिना फीस के भी लड़ते रहते है। बिहार में पुलिस की मनमानी व गैर कानूनी कार्रवाई राज्य के पुलिस के माथे पर लगा कलंक है।

NAPM ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से तीन सूत्रीय मांग किया है जिसमें बिंदु जी मामले की समीक्षा कराकर तत्काल उन्हें बिना शर्त रिहा करानेउनके साथ दुर्व्यवहार करने वाली थाना एसआई रूबी कुमारी और फर्जी मुकदमा दर्ज करने वाले थाना प्रभारी अमरेन्द्र कुमार को बर्खास्त किया जाए। और इस मामले की उच्च स्तरीय जाँच कराकर दोषी उच्च पदाधिकारियों पर भी कार्रवाई की जाए।

ज्ञापन भेजने वालों में प्रमुख रूप से उदय, शाहिद कमाल, आशीष रंजन, कामायनी स्वामी, मो कासिफ युनुस, विनोद रंजन,  अरविंद, किरण देव यादव, शांति रमण, नीरज, विनोद, जितेंद्र पासवान, शिवनारायण, संदीप, विद्याकर, रजनीश व महेन्द्र यादव थे। उक्त ज्ञापन की प्रतिलिपि बिहार के मुख्य सचिव , गृह सचिव, डीजीपी और पंचायती राज्य के प्रधान सचिव को भी भेजा है।

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